Thursday, August 19, 2010

जागरण के लेख के सन्दर्भ मैं मेरे विचार..

कांग्रेस की अनैतिकता..
वाकई कुलदीप जी ने जो तथ्य और जो मुद्दा उठाया है , और जो सवाल उठाये हैं उनका जवाब मिलना शायद मुश्किल ही नहीं नामुमकिन होगा..   क्योंकि सिर्फ दस्तावेजों की नहीं रह गई है चाहे आजादी से सम्बंधित दस्तावेज हों या आपातकाल से सम्बंधित दस्तावेज , चाहे सत्ता पक्ष हो या विपक्ष... हर कोई मौन है और शायद मौन रहेगा.. क्योंकि इन दस्तावेजों से किस को क्या फायदा होने वाला है ...  क्योंकि इस राजनितिक हमाम  मैं सब एक जैसे हैं....  ऐसे मैं उन दस्तावेजों के लापता होने की वजह नहीं बल्कि उसका ठीकरा किसके सर फोड़ा जाये और कांग्रेस खुद अपना दमन कैसे बचाए , सरकर का पूरा ध्यान तो सिर्फ इसी बात पर रहेगा ... वैसे भी कांग्रेस पार्टी हमेशा से ही अपनी गलतियों के बचाव के लिए अन्य गड़े हुए मुद्दों को उभरती आई है और सच्चाई से मुह छुपाती आई है.. ऐसे मैं कांग्रेस के अनैतिक आचरण को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता चाहे भोपाल कांड हो या बोफ़ोर्स कांड हो या इन दोनों घोटालों में बरती गई कांग्रेसी ढिलाई हर किसी को पता है...

उद्देश्य से भटका आयोजन..
इसी विषय पर मेरा एक पूर्व लिखित ब्लॉग पढ़ें.. बात सिर्फ कॉमन वेल्थ गमेस की नहीं है.. बातउस मुद्दे की है की क्या हमारे देश की नाक और इज्जत इन खेलों की वजह से दांव पर लग चुकी है वो भी ढीली ढाली और सुस्त " हिन्दुस्तानी "  कार्यशेली के कारन . यहाँ हुन्दुस्तानी से मेरा आशय हमारे देश की उस कार्य प्रणाली से है जहाँ हर किसी कार्य की तय समय सीमा हर तय समय पर एक और तय समय के लिए बढ़ा दी जाते है..  ऐसे मैं इन खेलों की वजह से हमारे देश की किरकिरी तो होना स्वाभाविक सी baat है..  और रही बात दिल्ली की बेहाल सूरत की तो दिल्ली का तो अब भगवान् ही मालिक है , वैसे शीला जी पूरी तरह से विश्वस्त हैं की तय समय सीमा के भीतर न सिर्फ दिल्ली में हो रहे विकास कार्य पूरे हो सकेंगे बल्कि दिल्ली कॉमन वेल्थ खेलों का आयोजन विश्वस्तर से भी बढ़ कर करेगी.  हाँ भाई हमे भी यही उम्मीद है वैसे भी अब तो खुद प्रधान मंत्री जी ने इन खेलों की कमान संभाल ली है ..   काश यह कदम उन्होंने पहले उथया होता .. तो कम से कम कलमाड़ी जी और उनकी मण्डली की वजह से देश की आम जनता की आँखों मैं यह खेल करक तो न रहे होते..   क्योंकि यह खेल चाहे  देश की साख को बचा जाएँ पर उस बहरे दिल्ली वाले आम इंसान का क्या जो इन खेलों के कारन पिछले न जाने कितने दिनों से परेशां हुआ जा रहा है...

जागरण के लेख के सन्दर्भ मैं मेरे विचार..

1 comment:

POOJA... said...

इस समय कॉमनवेल्थ खेल व्यवस्था पर ध्यान कम, ध्यान इस बात पर ज्यादा है कि इस गंगा मैया में कौन कितना हाँथ धो रहा है, या कहीं कोई नहा तो नहीं रहा?