Tuesday, August 17, 2010

टेंशन लेने का नहीं क्या...!!!

आज के इस भाग दौड़ और तनाव भरे जीवन मैं हमे हर पल किसी न किसी बात की चिंता बनी ही रहती है..हम चाहे कितना भी चाहें यह तनाव और यह चिंता हमे कहीं न कहीं  घेर ही लेती है जैसे की ,   जब हम घर से निकलते हैं तो ऑफिस जल्दी पहुँचने की चिंता , ऑफिस मैं बॉस के गुस्से से बचने की चिंता , ऑफिस में तरक्की पाने की चिंता , महीने के अंत मैं तनख्वा मिलेगी या नहीं इसकी चिंता  इत्यादि .  तो घर मैं तो चिंताओं का भण्डार ही लगा रहता है कभी बच्चों की पढाई लिखाई की चिंता तो कभी जरूरी चीजों की पूर्ती के लिए प्रबंध करने की चिंता , कभी इसकी तो कभी उसकी किसी न किसी बात की चिंता तो हर किसी को लगी ही रहती है ..
कहने को तो हमसे हर कोई कहता है की चिंता चिता के सामान होती है ,,  मगर इससे क्या कोई चिंता करना छोड़ देता है..  चिंता या टेंशन या तनाव कोई भी व्यक्ति जान भूझकर तो नहीं करता और कोई करना भी नहीं चाहता, लेकिन इस तनाव और चिंता ने अपना दायरा इस कदर बाधा लिया है की आज कल के बच्चे भी इसकी चपेट मैं आने लगे हैं, इसी का तो कारन   है की छोटी सी उम्र मैं बच्चे आत्महत्या जैसा कदम उठाने लगे हैं, यदि कोई बच्चा परीक्षा मैं फ़ैल  हो गया, या उसके नम्बर कम आये तो उसे चिंता और तनाव होने लगता है की अब क्या होगा , घर पर डांट पड़ेगी, पापा और मम्मी मारेगी  ..और भी तमाम तरह के विचार आने लगते हैं  बस हो गया उस बेचारे मासूम से बच्चे को तनाव या जिसे हम कहते हैं " स्ट्रेस" 
क्या इस चिंता या इस तनाव का कोई इलाज है ..  ???? हम में से हर कोई सोचेगा की इसका क्या इलाज होगा ???   मैं कहता हूँ की इसका इलाज है, और इलाज भी कोई बहुत पेचीदा नहीं है ,, इस इलाज को हर कोई अफ्फोर्ड कर सकता है , इलाज है की जितना भी हो सके खुशमिजाज रहिये , हर किसी मुसीबत का एक हल होता है इसलिए चिंता करने के बजाय मुसीबत या समस्या का हल ढूँढने की कोशिश करें, कभी भी तनाव आप पर हावी न हो इसलिए  सदा आशावादी रवैया लेकर चलें. कभी भी यह न सोचें की "" हाय राम अब क्या होगा"" जीवन हमारी सबसे बड़ी पाठशाला है इसलिए हर किसी बात से एक सबक लेकर चलें,  यदि आपके साथ कुछ गलत हो गया , कुछ नहीं मिला या आप किसी इम्तिहान मैं फ़ैल हो गए तो क्या हुआ ??? जिन्दगी वहीँ पर ठहर तो नहीं जाती न.. जरा सोचिये आज जो लोग कामयाब हैं. क्या उन लोगों ने तनाव का सामना नहीं किया ?  किया है और उस तनाव पर उन्होंने विजय पाई इसलिए आज यह लोग कामयाब हैं..अब्राहम लिंकन को आज दुनिया याद करती है लेकिन अपने समय में वे एक "  लूसर या एक असफल इंसान कहलाते थे"  तो क्या वे जीवन भर असफल रहे??  नहीं वे एक सफल राष्ट्राध्यक्ष बने और आज पूरा विश्व उनके बताये रास्ते पर चल रहा है..  इन बातों का ध्येय यही है की खुश रहिये और चिंता को अपने पर हावी मत होने दीजिये. चिंता मग्न होकर आप कोई काम करेंगे भी तो वो काम आपको नुक्सान ही पहुंचाएगा इसलिए खुशमिजाज रहें और आपके आसपास भी हंसी ख़ुशी का माहोल रखें , और हाँ कभी भी किसी पर अपनी राय  या अपना नजरिया थोपने से बचे क्योंकि इन्ही आदतों से तनाव और चिंता बढती है ...  याद रखें खुश रहेंगे तो आपको देख कर लोग भी खुश रहेंगे , लेकिन आपको रोता हुआ या तनाव ग्रस्त देख कर लोग भी आपसे कतराने लगेंगे ...और सोचेंगे की यार यह तो हमेशा ही टेंशन मैं रहता है ,  इसके पास आकर अपने को भी टेंशन लग जायेगी ..  चलो निकल लो इसके पास से..
ऐसा मत होने दीजिये और यदि कुछ गलत हो भी गया तो यह मत सोचिये की अब क्या होगा???   जीवन बहुत बड़ा है और आपके लिए भी उस इश्वर ने कुछ सोच रखा होगा इसलिए क्षणिक असफलताओं को भुलाकर जीवन का अनद लेते हुए अपने लक्ष्य को पाने मैं लग जाइये और देखिये की आप कहाँ पहुँचते हैं...

2 comments:

माधव said...

yes

sandhyagupta said...

हर किसी मुसीबत का एक हल होता है इसलिए चिंता करने के बजाय मुसीबत या समस्या का हल ढूँढने की कोशिश करें, कभी भी तनाव आप पर हावी न हो इसलिए सदा आशावादी रवैया लेकर चलें

अच्छी सीख दी आपने.