Tuesday, April 7, 2009

कुछ सोच लिया जाए !!!! पर क्या ???

घर पर युही बेकार और बेरोजगार बेठे बेठे मेने सोचा की चलो कुछ सोच लिया जाए! अपने खली दिमाग को थोड़ा सा काम दिया जाए, कुछ सोच लिया जाए.
सोचा की क्यों न जनहित और देश कल्याण के लिए सोचा जाए , बड़े बड़े विद्वान और महापुरुषों की जमात में शामिल हुआ जाए, कुछ सोच लिया जाए। तो सोचा यह की देश के विकास में जो रोड़ा हैं जैसे गन्दी राजनीती, स्वार्थ, लालच, आतंकवाद, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार इनको दूर कैसे किया जाए, थोड़ासोचा था की सोच पर भी राजनीती हावी हो जाए ! ऐसे में भला कैसे सोचा जाए। क्योंकि यदि इनको दूर कर दिया तो देश की ब्रांड इमेज का क्या होगा यही सोच कर इस सोच को त्याग दिया जाए , कुछ और सोच लिया जाए।

अब सोचा क्यों न थोड़ा सा मनोरंजक आईडिया सोच जाए क्यों न टी.वि पर कुछ नया लाया जाए, रियलिटी शो, म्यूजिक शो के बाद कुछ और लाया जाए, क्यों न झलक के मंच पर अपने बालिए के संग डांस पर चांस मार लिया जाए, पर यह सोचा था ही की इसमे में सास बहु का झगडा रोड़ा अटकाए , ऐसे में क्या और कुछ सोचा जाए।
सोचा की क्यों न कुछ और किया जाए, आराम छोड़ कर कुछ काम किया जाए , पर मुझ बेरोजगार को कुछ काम तो न मिला यही सोच कर काम पाने के नुस्खे वाली पुस्तक ही पढ़ ली जाए, पुस्तक ने भी मेरा दिमाग चकराया , यहीं पर मेरा मन भी घबराया , वैसे भी सोच कर किसका क्या हुआ है,जिसने सोचा वही पछताया है, मेरी सोच भला मुझे क्या देगी, इसने किसिस को क्या दिया है जो मुझे भे देगी, यही सोच कर मेने सोचा की सोच को आराम दिया जाए और कर लिया जाए कोई जॉब क्योंकि अब तो गली का कुत्ता भी दिखता है मुझे" रॉब".

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