Thursday, July 23, 2009

जब मेने देखा ......... भूत"

आज के हाई फाई जमाने में शायद ही कोई यकीन करता होगा की दुनिया में भूत, प्रेत या आत्माओं का कोई वजूद है? सिवाए महेश भट्ट या राम गोपाल वर्मा के ... लेकिन यह कोई मजाक नही है । में ख़ुद एक ऐसा बन्दाहूँ जो इन सब बातों को बकवास की हद मानता था, यह भूत , प्रेत की बातें सिर्फ़ डराने के लिए ठीक लगती थी जब तक की मेने ख़ुद उस पल का सामना नही किया था !
पिछले दिनों मुझे मेरे गाँव में जाने का मौका मिला ... एक वीरान से जगह हर तरफ़ से यमुना नदी से घिरा हुआ मेरा गाँव किसी डरावनी फ़िल्म के सेट से कम नही है, हर तरफ़ से एक अजीब सी आहट , अजीब सा सन्नाटा ... जैसे की किसी अनहोनी के होने का इशारा , गाँव वालों से कुछ इसी तरह की बातें सुनने को मिलती रहती थे की आज उस पर कोई हवा आई है, तो कल उस पर कोई भूत का साया था तो कल किसी की कुश्ती भूत से हो गयी... इन बातों से मन में एक डर समां गया था... लेकिन एक दिन मेरे पड़ोस के घर में से अजीब सी आवाज आने लगी , सामने देखा तो पड़ोस वाले घर में आई नयी बहु की आँखें बदली हुई है, चेहरा एकदम डरावना सा है, बाल बिखरे हैं, आवाज में बदला लेने की ललकार है, ऐसा मंजर जो मेने आज तक नही देखा था... खैर गाँव में तो इस तरह के किस्से आम बात है और इन किस्सों का निदान भी कोई बड़ी बात नही है..... पर जो मंजर इन आंखों ने देखा वोह शब्दों में बता पाना इतना आसन भी नही है.

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