Powered By Blogger

Thursday, December 31, 2009

भ्रम

भ्रम क्या है ????
वो जो हम देख रहे हैं,,  या वो जो हमसे छुपा है,या छुपाया जा रहा है !!! सच्चाई और भ्रम के इसी चक्कर में इंसान की जिन्दगी फंसी हुई है...   भ्रम  को समझ पाना  जितना मुश्किल होता है उतना ही खतरनाक होता है हमारे लिए .भ्रम को न जान पाना . आखिर क्या है फर्क भ्रम और सच के बीच ?  इसी जदोजाहत के बीच में फंसी है हमारी , तुम्हारी और हर किसी की जिन्दगी .......    
ऐसा ही कुछ हो रहा है  शिव के साथ ..  उसे लगता है की जिन्दगी में उसे जो भी लोग मिले हैं सब उसके दोस्त और चाहने वाले ही हैं, कोई भी उसका दुश्मन नहीं है, लेकिन यह भ्रम जब तक रहता है सब कुछ ठीक रहता है लेकिन जैसे ही यह भ्रम टूटेगा तो क्या होगा ????...  यही सब कुछ है इस कहानी में जिसका नाम है """भ्रम"" 

Thursday, December 3, 2009

अब से कोई भी करो मत दान यानी... की say no vote.....

ज्यादअ समय बीता नहीं है लोकसभा चुनाव को बीते,  याद है किस तरह से हमने अपने वोट का प्रयोग बढ़ चढ़ कर किया था , ताकि हम चुन सके अपनी सबसे बेहतर सरकार.... तमाम तरह के चुनावी वादों के बीच जनता ने चुने थे अपने पसंदीदा उम्मीदवार ताकि वेह कुछ नया कर सकें.....   लेकिन क्या हम कुछ नया देख्ज रहें है....  ?????   हाँ नए के नाम पर नए घोटाले,,  नए नए विवाद नया नया विरोध तो नयी नयी  सुलह...      कभी हम सुनते और देखते हैं की किस तरह मदु कोड़ा ने बटोरे हजारों करोड़  रुपये ..  तो हमने देखा राज ठाकरे के चुने गए विधयानको की गुंडागर्दी वोह भी  विधानसभा में...  तो अभी हाल ही में मुलायम आयर कल्याण सिंह की जानी दोस्ती कब टूट गयी कोई नहीं जान पाया...    हद हो चुकी है....  क्या अब भी हम लोगों को किसी नेता को वोट देना चाहिए,,,  किसी को भी चुनो  सब के सब एक जैसे ही निकलते हैं.....  जो आज हमारे साथ है..  वोह कल किसी और के साथ हो जायेगा...  जो आज आये हैं  वोट मांगने की हम जनता की सेवा करेंगे,, अल को लाल या नीली बत्ती लगा कर विशेष अधिकारों से लेस्स  होकर हमे ही दुत्कार के भगायेंगे....  इसलिए...  लोकतंत्र के हित में अब हम जनता को ही आगे आना होगा..   इसलिए...   मत करो अपना कीमती  वोट दान.....   मत करो मतदान...

Tuesday, December 1, 2009

THE END

THE END....     यह कहानी है एक अंत की....  जिसको कोई भी लाख कोशिश करके भी ताल नहीं सकता...  कहानी शुरू होती है... मुंबई में हुए २६\११ के बाद के हालात की,,  जहाँ पर अब सब कुछ सामान्य हो चूका है.. लोग सब कुछ भूल कर जीवन को फिर उसी तरह से जी रहे हैं... लेकिन हर किसी के मन में यह दर कहीं न कहीं है की न जाने कब क्या हो जाए....  ऐसे ही एक दिन अतुल जो की पुलिस में है...    मिलता है एक अनजान सी लड़की से जो अपने मन में पाले है अजीब सा गुस्सा इस समाज के प्रति, इस सत्ता के प्रति और इस पुलिस और क़ानून के खिलाफ क्योंकि उसके मुताबिक़ उसने पिछले दिनों जो कुछ भी खोया है इन सब के कारन खोया है  और वो इस सब का अंत करके रहेगी.......    इस बात को अतुल और हर कोई एक पल का गुस्सा समझ कर भुला देते हैं.....  लेकिन एक अंत की शुरुआत हो चुकी थी  क्या था वोह अंत  या अब क्या hone wala

Tuesday, October 6, 2009

it happens only in india......

वैसे तो हमारे देश में सब कुछ गड़बड़ झाला  होता रहता है किसी को कुछ लेना देना तक नहीं रहता यहाँ तक की अपनी सरकार को भी नहीं. वैसे देखा जाए तो  सरकार को और सरकार के मंत्रियों को तो ५ साल तक चुनाव की थकान मिटाने से फुर्सत नहीं मिलती और इस थकन का थोडा सा मजा सरकारी अधिकारी भी ले लेते हैं तभी तो देश में भ्रष्टाचार हर तरफ बढ़ता जाता है.

अब देश में बाढ़ आई हुई है हर तरफ से आवाज उठेगी  की इतने  हजार करोड़ रुपये की जरूरत है , जितनी भी जरूरत होगी सरकार देगी आखिर मांग जो हुई है...   वहीँ अगर कोई बेरोजगार व्यक्ति अपने नौकरी या किसी और काम से मदद मांगेगा तो उसे ५०० या १००० रुपये पकडा कर नमस्ते कर लिया जाता है.

कोई नेता अपनी प्रतिमा या मूर्ती बनवाने में अरबों रुपये लगा देता है, फिर भले ही वहां की जनता भूक से मर रही हो पर उस नेता को क्या. कोई बात नहीं और तो और अदालत हो या कोई और किसी की किसी को परवाह कहाँ है....    इसी लिए तो  अपना देश महान है भीडू !!!!

Monday, August 24, 2009

यह मुद्रा स्फिति और महंगाई का क्या चक्कर है भाई ??

इस बात पर तो एक कॉमेडी फ़िल्म बनाई जा सकती है ! एक तरफ़ तो सरकारी आंकडों के मुताबिक मंहगाई की डर नीचे की तरफ़ जाती जा रही है, पर हर चीज की कीमत ऊपर की तरफ़ जाती जा रही है! शक्कर, दाल , चावल या फिर सोना, चांदी या कोई भी चीज हो दाम के मामले में इनका मिजाज ऊंचा हेऔर शायद रहेगा भी ऊंचा, शायद महंगाई आजकल यही गीत गा रही है की " झंडा ऊंचा रहे हमारा" ।

खैर सरकार और उसके सरकारी आंकडे हमेशा से ही समय और हकीकत से पीछे चलते रहे हैं और शायद चलते रहेंगे , पर बेचारा आम आदमी अपने नसीब पर रोता रहेगा और यही गाना गाता रहेगा की " बाकी कुछ बचा तो महंगाई मार गई" .

Thursday, July 23, 2009

जब मेने देखा ......... भूत"

आज के हाई फाई जमाने में शायद ही कोई यकीन करता होगा की दुनिया में भूत, प्रेत या आत्माओं का कोई वजूद है? सिवाए महेश भट्ट या राम गोपाल वर्मा के ... लेकिन यह कोई मजाक नही है । में ख़ुद एक ऐसा बन्दाहूँ जो इन सब बातों को बकवास की हद मानता था, यह भूत , प्रेत की बातें सिर्फ़ डराने के लिए ठीक लगती थी जब तक की मेने ख़ुद उस पल का सामना नही किया था !
पिछले दिनों मुझे मेरे गाँव में जाने का मौका मिला ... एक वीरान से जगह हर तरफ़ से यमुना नदी से घिरा हुआ मेरा गाँव किसी डरावनी फ़िल्म के सेट से कम नही है, हर तरफ़ से एक अजीब सी आहट , अजीब सा सन्नाटा ... जैसे की किसी अनहोनी के होने का इशारा , गाँव वालों से कुछ इसी तरह की बातें सुनने को मिलती रहती थे की आज उस पर कोई हवा आई है, तो कल उस पर कोई भूत का साया था तो कल किसी की कुश्ती भूत से हो गयी... इन बातों से मन में एक डर समां गया था... लेकिन एक दिन मेरे पड़ोस के घर में से अजीब सी आवाज आने लगी , सामने देखा तो पड़ोस वाले घर में आई नयी बहु की आँखें बदली हुई है, चेहरा एकदम डरावना सा है, बाल बिखरे हैं, आवाज में बदला लेने की ललकार है, ऐसा मंजर जो मेने आज तक नही देखा था... खैर गाँव में तो इस तरह के किस्से आम बात है और इन किस्सों का निदान भी कोई बड़ी बात नही है..... पर जो मंजर इन आंखों ने देखा वोह शब्दों में बता पाना इतना आसन भी नही है.

Wednesday, July 1, 2009

APNO INDORE...... LAJAWAB INDORE




WoW what rememberance of Indore...:-)